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'यह पुस्तक मेरी स्वर्गीय माँ, श्रीमती यशोदा देवी, द्वारा लिखी गयी है। इस पुस्तक में कुछ कवितायें, गीत, लोकगीत, एवं भजन मेरी माँ ने लिखे हैं और कुछ उन्होंने विभिन्न स्त्रोतों से इकठ्ठा किये हैं। आशा है आप लोग भी इन भूले बिसरे गीतों, कविताओं, लोकगीत, और भजनों को उतने ही चाव से पढ़ेंगे जितने प्यार से मैने इन्हे दुबारा लिखा है।
मेरी माँ चौथी-कक्षा पास थीं पर उनके बहुत से लेख, कहानियां, कवितायेँ आदि सरिता, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, धर्मयुग जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई थीं। उनको जीवन का अनुभव था, और वे सहनशील एवं शांत स्वभाव की थीं। वे 10 मई 1915 के दिन गाज़ीपुर में पैदा हुईं थी। उनका देहांत 10 मार्च 1968 के दिन नई दिल्ली में हुआ था। उनका विवाह पंद्रह साल की उम्र में ठाकुर बटुक सिंह से हो गया था। वे अपने पति, जो की कंट्रोलर जनरल ऑफ़ डिफेन्स एकाउंट्स के पद से रिटायर कर के चार साल पटना में काम कर के वापस यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन में सर्व किये थे, के साथ पूरे भारत में घूमी थीं। उनको शुरू से लिखने का शौक था। उनके पास डिग्रीयां नहीं थीं पर वह सही मायने में शिक्षित थीं।
सविता सिंह ने अपनी पढाई मथुरा रोड और सेंट जोसेफ कान्वेंट हाई स्कूल, पटना से की। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से विमानन मनोविज्ञान में महारथ हासिल किया। सविता सिंह 1979 से पेशेवर रूप से लिख रहीं हैं और 350 से अधिक प्रकाशित पुस्तकें, लघु कथाएं, लेख, कविताएँ आदि का श्रेय उनको जाता है।
उनकी शादी एक भारतीय सेना अधिकारी से हुई जिनकी 1990 में ड्यूटी के दौरान एक दुखद दुर्घटना में मृत्यु हो गयी। सविता सिंह के काम कई पत्रिकाओं और मैगज़ीनों में प्रकाशित हुए हैं।
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